चार दिन

चार दिन के चार हैं मौसम,
बरखा और बेज़ार के मौसम,
दौड़े ख़ुशियों की ख़ातिर और,
हाथ है आया सबके ग़म ।
कोई कुछ तो ग़लत चला,
फूल की जगह शूल खिला,
जिया जो बरसों खटखट करते,
जाते वक़्त क्या उसे मिला ।
राजा तन मन रानी एक,
सबकी वही कहानी एक,
राजा जो रानी का नौकर,
भटके पानी पानी देख ।
चार दिन के चार हैं मौसम,
जिसमें घुल मिल रहते हम ।
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