likh Kuch Apni – लिख कुछ अपनी – Hindi Poem

Likh Kuch Apni – लिख कुछ अपनी – Hindi Poem

निकाल कुछ पल ऐ दिल,
लिख दास्ताँ अपनी,
यादों की स्याही घोल,
फुरसत की कलम अपना |
खोल तिजोरी सपनों की,
रंग बिखेर बचपन के,
उड़ा छटा जवानी की,
खुशियों के अफ़साने बाँध |
दर – दर भटके शहरों में,
कुछ सिक्कें कमाने को,
रूह जलाए और तन भी,
किसके लिए ये दौलत है ?
रोगों का पिटारा लेकर,
देह तेरी तड़पती है,
ऊँचा उठने का वो जुनून,
छिन गया सुकून सब |
खुद ही फँसता जाता है,
झूठे हँसता जाता है,
वक्त निकलता जाता है,
हाथ धरे फिर रोता है |
इसीलिए तो कहता हूँ,
खुद को जान, दिल में झाँक,
धड़कन में जो कैद पड़ी,
लिख दास्ताँ अपनी,
यादों की स्याही घोल,
फुरसत की कलम अपना |
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