ZID KE KAARNAAME – ज़िद के कारनामे – gazhal

Zid Ke Karname – Gazal – rahulrahi.com
ज़िद में बहकर चाहते, किनारा खो चले,
पतवार वाले अपनी, नाव खो चले।
रात तूफान से तो, बच गए जैसे-तैसे,
सुबह कब हुई, क्या पता, अपनी आँख खो चले।

शेखीयत का हमारी, आप यूँ अंदाजा लगाएँ,
खामोश रहकर, हम दिख रही, मदद खो चले।
ज़मीं या आसमाँ में हैं, पता नहीं लगता,
कहीं ऐसा तो नहीं कि गहरे घाट में खो चले।
ये जो अब कुछ दिखा है हमें, ज़िन्दगी या मौत,
ये बेजान शरीर पानी के कंधो पे खो चले।
–  अंकित अग्रवाल  –
Instagram – @imankyt

Ankyt Agrawal, gazal, hindi poems June 20, 2017 at 10:50PM

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