i will see you – नाना ! तुम्हेँ देख लूँगा – hindi story

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नाना देख लूँगा तुम्हें – क़िस्सा – rahulrahi.com

दोनों हाथों से चड्डी संभाले, गीले क़दमों से मैं सरपट दौड़ लगा रहा था और ननिहाल के सारे लोग मुझे पकड़ने के लिए झपट रहे थे ।

“नाना ! तुम्हेँ देख लूँगा”।

एक यही रट लगाए मैं भागता हुआ सीधे कमरे में पहुँचा और अपने छोटे-छोटे हाथों से जोर लगा के दरवाज़ा बंद कर लिया।

हुआ ये था कि दिन था मकर संक्रांति और नानाजी जो सुबह-सुबह से एक एक बच्चे को पकड़-पकड़कर नहला रहे थे, मुझे भी दबोच कर बिठा दिया हैंडपंप के नीचे और छपाक छपाक पानी। ऐसी भी क्या जल्दी नहलाने की, कोई युवराज तो थे नहीं कि राज्याभिषेक करना हो गया। मुझसे बर्दाश्त ही नहीं हुआ, पहले पानी को देखा, फिर नाना को, फिर नानी को… और बाकी जो जगह दिखी तो उसमें से जान बचा के भाग लिए।

“नाना ! तुम्हेँ देख लूँगा” ।

अब कमरे के अन्दर से मैं ये चिल्ला रहा था।

नाना-नानी तो बेचारे लालच आहा लपलप वाले तरीके अपनाने लगे कि आजा बेटा बाहर… खीर, हलवा, मिठाई मिलेगी पर मम्मी आख़िर मम्मी… “चुपचाप अभी बाहर आजा… वरना चप्पल झाड़ू से सुताई के लिए तैयार हो जा।”

फिर आख़िरी पैंतरा… “आ रही है बेट्टा पुलिस… ले जाएगी पकड़ के तो सारी नक्शेबाजी उतर जाएगी।”

बस अपन तो पहले ही गीले थे और ऊपर से डर के मारे पसीना अलग। खोल दिया दरवाज़ा और डाल दिए हथियार… कर दिया सरंडर।

थोड़ी डाँट पड़ी और फिर से तमीज़ से नहलाई धुलाई।

पर रट अब भी वही थी पर थोड़ी सी धीमी आवाज़ में –

“नाना ! तुम्हेँ देख लूँगा”।

– Anoop Kumar –
@anoop_kahil

anoop kumar, hindi stories July 05, 2017 at 05:25PM

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