Ye Ghar Kiska Hai – ये घर किसका है ?

‘किसना.... अरे ओ.. किसना....,’ आजी (दादी) सुबह – सुबह किसना को आवाज़ दे रही थी, जो घर के पासवाले बाग़ में तितलियों के पीछे चक्कर काट रहा था | दादी की मद्धम सी आवाज़ सुन किसना ने जवाब दिया, ‘आया दादी, बस पकड़ ही लूँगा आज इसे |’ मन ही मन वह बुदबुदाया, ‘आज तू... Continue Reading →

SOOKHE ANGOOR (DRY GRAPES) / सूखे अंगूर

“ किश्मिश ले लो, ताकत से भरपूर, स्वाद में पूर, किश्मिश ले लो |”, अप्रैल का महिना था | धूप बे-इन्तहा थी लेकिन फिर भी उसके गले की धार ज़रा भी कम ना हुई | पसीने से तर उसका शरीर चिलचिलाती धूप में चमक रहा था | एक पीली मैली बनियान और खाकी हाफ चड्डी... Continue Reading →

Blog at WordPress.com.

Up ↑